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Bhagwad Geeta

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"अर्जुन ने कहा: हे मधुसूदन आपने जिस योग्य पद्धति का संक्षेप में वर्णन किया है वह मेरे लिए और अव्यवहारिक तथा और असह्य प्रतीत होती है ,क्योंकि मन अस्थिर तथा चंचल है।"  भगवतगीता (6.33)

LIVELIHOOD - आजीविका

 आजीविका  कुछ लोग हैं जो आर्थिक रूप से सक्षम नहीं है या जो कुछ भी कमाई नहीं कर पा रहे हैं कारण या तो उनकी पसंद का काम नहीं मिल पा रहा है या जो भी उनके पास उपलब्ध है वह करने में सक्षम नहीं है।      ऐसा नहीं है कि काम की कमी है काम तो सर्वत्र उपलब्ध है बस कमी है तो हमारी मानस स्थिति की अगर ऐसी समस्या से जो लोग जूझ रहे हैं, नित्य पैसे जिनके पास नहीं है ऐसा नित भय सता रहा है ,कैरियर नहीं बन पा रहा है समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें तो उनको अपने दिमाग पर अपने अवचेतन मन तक पहुंचना होगा क्योंकि वहां से ही शुरुआत होगी अपने अवचेतन मन से ही शुरुआत होने वाली है वरना फिर काम चाहे कोई भी कर लो काम चाहे उत्कृष्ट करो या निकृष्ट भी कर लो पसंद नहीं वह भी कर लो पर समस्या यह है कि ज्यादा पैसा कमा नहीं पाओगे तरक्की नहीं कर पाओगे या फिर वह काम आपकी मानसिक स्थिति को बिगाड़ने वाला हो सकता है बहुत सी छोटी-छोटी समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं तो हमेशा ही आर्थिक स्थिति से परेशान रहोगे । काम नही बन पा रहा है या यह समझ नहीं आ रहा है कि क्या करें तो अपने दिमाग पर या अपने अवचेतन मन तक पहुंचना हो...